जिला प्रशासन एक तरफ शहर को सुंदरीकरण बनाने हेतु धनवान लोगों को सहयोग का अवसर प्रदान रहा है तो वहीं प्रशासन से कई हाथ आगे चलकर पुलिस महकमा भी अपने गुणगान की फतह हासिल करता नजर आ रहा है।
जिसके अंतर्गत जनपद जौनपुर में विगत वर्ष 2017 से 21 तक एसपी सिटी रहे डॉक्टर अनिल कुमार पांडे ने शहर कोतवाली थाना अंतर्गत बड़े हनुमान मंदिर के निकट स्थित शिव मंदिर को अपनी ट्रस्ट की परिधि में समेटते और काश्तकारों की कई बिस्वा भूमिधरी भूमि को अवैध रूप से लपेटते हुए जौनपुर में छोटा काशी बनाने का महारत हासिल किया। खबर लिखने वाले पत्रकार और उसके परिवार को समाज के सामने अपराधी बनाने और बताने का पुलिसिया हथकंडा भी अपनाया सूत्रों के अनुसार अपने अग्रज की राह और तर्ज पर चलते हुए वर्तमान एसपी सिटी डॉक्टर संजय कुमार रामघाट को छोटा वाराणसी बनाने जा रहे हैं। जिसके उद्देश्य से स्थगन आदेश के बावजूद विवादित भूमिधरी पर वास्तुविद ज्योतिषी पंडित उपाध्याय को प्रेरणा स्रोत बताते हुए मां काली के श्री चरणों में श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए डॉ संजय कुमार द्वारा नई पुलिस चौकी पर जीर्णोद्धार दिनांक 22 अगस्त 2021 दिन रविवार का बोर्ड लगा कर
उद्घाटन किया गया।लोकसेवकों का धर्म और संपत्ति के प्रति बढ़ता स्नेह तथा लगाव विशेष टकराव स्वरूप घर्षण एवं आकर्षण पैदा करता नजर आ रहा है। जिसके फल स्वरुप मंडवीवर उर्फ पचहटिया निवासी रतन सिंह चौहान पुत्र शोभा चौहान ने मुख्यमंत्री से लेकर गृह सचिव पुलिस महानिदेशक,जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार लगाते हुए आरोप लगाया है कि एसपी सिटी डॉ संजय कुमार ने अपनी धर्मपत्नी को जौनपुर निबंधन कार्यालय में रजिस्टर्ड ट्रस्ट श्री राधा कन्हाई फाउंडेशन चैरिटेबल ट्रस्ट का महासचिव तथा परिवार के अन्य सदस्यों का पदाधिकारी बनाते हुए राम
घाट स्थित उनकी 11 बिस्वा भूमिधरी जमीन पर फर्जी तरीके से ट्रस्ट का नाम दर्ज करवा लिया जिसका उप जिलाधिकारी सदर कार्यालय में वाद लंबित है।
इतना ही नहीं पूर्व प्रधान रहे समाजसेवी रतन सिंह चौहान ने बताया कि उनके ऊपर डॉ संजय कुमार ने आधा दर्जन अपराधिक मुकदमा दर्ज करवा कर उन्हें जिला बदर भी करवाने का प्रयास किया। अब पुलिस सौजन्य से जनपद जौनपुर में छोटा काशी के बाद स्थापित होने जा रहा छोटा वाराणसी क्या गुल खिलाएगा यह तो आने वाला समय ही बताएगा। पीड़ित बेबस लाचार समाजसेवी एसपी सिटी के चंगुल से अपनी जमीन और जिंदगी बचा पाएगा अथवा पुलिस की हिकमत अमली का शिकार होकर रह जाएगा।
कुल मिलाकर पीड़ित को यह चिंता सता रही है कि शायद वह दिन भी जल्द आने वाला है जब श्रद्धा के संग समर्पित होकर पुलिस के आला अधिकारियों के संग अपराधी भी बेफिक्र होकर तिलक लगाकर घंटा बजाएंगे और जयकारा लगाएंगे तथा बेकसूर एनकाउंटर में मारे जाएंगे। यह चिंता के साथ-साथ जांच का भी विषय नजर आता है।




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