भू माफियाओं और लेखपालों की जुगलबंदी से अधिकांश गांव तथा शहर के लोग अनायास ही कोर्ट कचहरी का चक्रमण करते नजर आते हैं। जिलाधिकारी के दिए गए आदेशों के विपरीत भू माफियाओं के बुलावे पर हल्का लेखपाल बगैर विधिक अधिकार के दौड़ते हुए विवादित जमीनों की पैमाइश करने चले आते हैं।
राह में रोड़ा बन रहे विपक्षियों को पत्थर गड्डी उखाड़ फेंकने इत्यादि का फर्जी मुकदमा दर्ज कराकर अथवा पुलिस सहयोग और सौजन्य से जिला बदर कराकर ना सिर्फ मनमाने तौर पर जमीनों पर अधिग्रहण किया जाता है बल्कि खुलेआम खरीद-फरोख्त का व्यापार सरकार को चूना लगाते हुए बेखौफ ढंग से किया जाता है।
प्रीत टाइम्स संवाददाता को नाम ना छापने की शर्त पर एक लेखपाल ने बताया कि मातहतअधिकारियों के रहमोंकरम पर कूट रचित दस्तावेज के बल पर खुलेआम नजूल, तलाब, पोखरा, झील ,एवं पार्क तथा सरकारी भूमि और भवनों पर पैसे वालों को अवैध रूप से कब्जा दिलाया जा रहा है तथा वही दबाव देकर चिन्हित लेखपालों से मनमर्जी रिपोर्ट लगवा कर लाखों करोड़ों की संपत्तियों का वारा न्यारा किया जा रहा है ।
ऐसे में सरकारी संपत्तियों पर अवैध कब्जे की जिम्मेदारी की भागीदारी अकेले लेखपाल पर पूर्णतया नाइंसाफी होगी। जिलाधिकारी के इस आदेश से जहां भू माफियाओं और श्वेत पोश अपराधियों में दहशत व्याप्त है वही भू माफियाओं के चहेते मातहत कर्मियों में हाहाकार नजर आती है।

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