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Wednesday, 29 April 2026

पूर्वांचल विश्वविद्यालय फिर हुआ सुर्खियों में शुमार


जौनपुर । पूर्वांचल विश्वविद्यालय लगातार सुर्खियों में शुमार होता नजर आता है । इन दिनों वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में किताबों की खरीद फरोख्त में करोड़ों का घोटाला सामने आया है। पूर्वांचल विश्वविद्यालय ने 5 वित्तीय वर्ष में लगभग 33 करोड़ रुपये की किताब खरीदी है। जबकि ये किताबें बच्चों को पढ़ने के लिए उपलब्ध नहीं हो पाई हैं। वहीं विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ने अपने पिता द्वारा लिखी गई किताबों की हजारों प्रतियां केंद्रीय पुस्तकालय में मंगाई है। इस पूरे मामले पर राजभवन द्वारा विश्वविद्यालय से आख्या मांगी गई है।

पूर्वांचल विश्वविद्यालय के शोध छात्र उद्देश्य सिंह ने विश्वविद्यालय में स्थित स्वामी विवेकानंद केंद्रीय पुस्तकालय में किताबों के खरीद फरोख्त को लेकर करोड़ों के घोटाले का आरोप लगाया है। इस घोटाले का आरोप विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. मानस पांडे पर लगा हैं। आरोप है कि प्रोफेसर मानस पांडे ने 2017- 22 के पांच वित्तीय वर्षों में लगभग 33 करोड़ रुपये की किताबों की खरीद की थी इनमें से ज्यादातर किताबें सिलेबस की नहीं थी।

इतना ही नहीं बल्कि अपने परिवार को आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए डॉक्टर मानस पांडे ने अपने पिता की लिखी हुई किताबों की हजारों प्रतियां भी खरीद ली। शिकायतकर्ता उद्देश्य ने बताया कि लाइब्रेरी में बुक्शेल्फ में उनके पिता की लिखी हुई हजारों किताबें पड़ी हुई है। इनमें से ज्यादातर किताबें बच्चों को इशू भी नहीं की जाती हैं।


उद्देश्य का आरोप है कि विश्वविद्यालय में इस दौरान हजारों करोड़ के ई-जनरल्स भी ख़रीदे। लेकिन ई बुक्स और जर्नल्स के एक्सेस छात्रों को नहीं मिले। उद्देश्य का कहना है कि राजभवन और विश्वविद्यालय दोनों ही जांच रिपोर्ट देने में लीपा पोती कर रहे हैं। उसने बताया कि प्रोफेसर मानस पांडे प्रभावशाली व्यक्ति हैं।

उद्देश्य ने बताया कि कई बार उसने जन सूचना अधिकार और आईजीआरएस के माध्यम से रिपोर्ट मांगी लेकिन आख्या सौंपने में विश्वविद्यालय आनाकानी कर रहा है। 2022 से यह मामला दबाकर रखा गया है। बार-बार सूचना के अधिकार से मांगने के बाद भी यह रिपोर्ट लगा दिया जाता है कि अभी आख्या अप्राप्त है, अभी उच्च शिक्षा शासन द्वारा कार्यवाही की जायेगी लेकिन कहीं से कोई कार्यवाही नहीं हो रही है।

उद्देश्य का आरोप है कि यह मामला लगभग 50 करोड़ रुपये का है. उद्देश्य का कहना है कि बगल में आजमगढ़ में विश्वविद्यालय बनाने की लागत में 50 करोड़ रुपए खर्च हुए। लेकिन पूर्वांचल विश्वविद्यालय में 50 करोड रुपए की किताबें आई और वह किताबें भी बच्चों को पढ़ने के लिए नहीं मिल रही है।

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