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Thursday, 10 September 2020

जिलाधिकारी का अद्भुत और विचित्र कारनामा


जौनपुर। जनपद में तैनाती पाते ही एकल पद्धति से मशहूर जिलाधिकारी दिनेश कुमार सिंह ने

लेखपालों के चरम पर पहुंच चुके लूट घसोट पर नियंत्रण की कवायद की जिसमें पूरी तरीके से नाकामयाब रहे ।जिस कारण जनपद में आज हर विभाग के हर पटल पर झूमकर भ्रष्टाचार का जयकारा लगता नजर आता है। जनपद में प्रथम बार यह देखने को मिला जहां मुख्यमंत्री की मंशा के विपरीत जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने चाहेतो तथा विभागीय कर्मियों को छोड़कर अन्य नंबरों से सरकारी नंबर पर आने वाले फोन को रिसीव करना बंद कर दिया जिस कारण जनपद लगातार अपराध और भ्रष्टाचार की आग में झुलसता और तपता रहा। शिक्षा विभाग में चेकिंग अभियान शुरू हुआ जहां जिलाधिकारी ने कुछ के खिलाफ किया कठोर कार्यवाही तो वही उसी गलती अंतर्गत अन्य की पीठ थपथपाई जो धीरे-धीरे चर्चाएं आम होता गया । स्वच्छता मिशन की कमान को अपने हाथों में लेते हुए रात्रि सफाई अभियान भी आज बिहान नजर आया जिसका खामियाजा यह हुआ कई करोड़ की लूट कर चुके नगर पालिका परिषद पर कार्यवाही की जगह सफाई की रहनुमाई हवा हवाई नजर आयी। जिस कारण अब शहर के अधिकांश क्षेत्रों में सप्ताह में होने वाली साफ-सफाई भी कई महीनों तक नदारद होती नजर आई। जिसके अंतर्गत कागज में पूरा जनपद सेनीटाइजर होता रहा जबकि जनपद नगर पालिका की लाचारी से कराहता और रोता नजर आया। इसी के साथ विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत बन रही सड़क तथा नालियां भी बदहालियों का गीत गाती नज़र आयी। योजनाओं का शिलान्यास होने से पहले योजनाएं ध्वस्त और पस्त तथा जिम्मेदार लूट घसोट करने में मस्त नजर आए ।लूट में शामिल अधिकांश सभासद और उनके परिजन तथा माननीयों के रिश्तेदारों ने भी जमकर ठेकेदार के नाम पर ठगी का ठुमका लगाया जिनके ऊपर लिखित कार्यवाही की जगह जिलाधिकारी ने खामोशी दिखाया। महामारी के दौरान गरीबों के हक और खाद्यान्न पर अधिकांश डाका डालते नजर आए वहीं एकल पद्धत अंतर्गत एक ग्राम प्रधान तथा दो शिकायतकर्ताओं को ही जबरन जेल में भिजवाकर दोबारा उठने वाली अंगुलियों पर विराम लगाते नजर आए जिस कारण पीड़ित, बेबस लाचार अपना हक त्यागते और प्रशासनिक सहयोग , संरक्षण प्राप्त लुटेरे कालाबाजारी करते हुए खाद्यान्नों को ट्रकों में भरकर अन्य जनपद भेजते और बेचते नजर आए। कोरोना महामारी काल में जान जोखिम में डालकर पत्रकारिता कर रहे पत्रकारों पर मेहरबान हो कर सुरक्षा किट के नाम पर शाहगंज विधायक ललई यादव ने एक लाख का सहयोग दिया जो आज तक वितरित नहीं किया जा सका तथा वही कुछ पत्रकारों को जिलाधिकारी चमनप्राश खिलाते और यूमिनिटी बढाते नजर आए जबकि अन्य वयोवृद्ध पत्रकार अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। जिलाधिकारी की अद्भुत और चमत्कारी दृष्टि में जो लोग उन्हें भाते हैं वही असली पत्रकार कहलाते हैं जिनके साथ मन की बात और विभागीय पत्रकारिता का कोरम पूरा कर जाते हैं जो अक्सर सरकारी योजना अंतर्गत उद्घाटन और खाद्यान्न बांटते नजर आते हैं। एकल पद्धति अंतर्गत जिलाधिकारी ने सड़क पर बैठे मोची का कभी सड़क पर ही खाता खुलवाया तथा वही किसी विधवा को घर बैठे पेंशन योजना का लाभ दिलवाया तथा पोस्ट ऑफिस से घर बैठे स्वयं रुपया निकाल कर दिखाया जबकि आज हालात इस कदर बद से बदतर नजर आते हैं की जनपद में तैनात अधिकांश एटीएम बंद नजर आते तथा बैंकों के बाहर सोशल डिस्टेंस की धज्जियां उड़ाते लोग धूप में हांफते और कराहते नजर आते हैं। वही पत्रकारिता से जुड़े छायाकार को हार्ट अटैक का दौरा पड़ने पर अस्पताल का दौरा तथा दूसरी तरफ कोतवाली पुलिस के द्वारा फर्जी नागपाश में फास्कर पत्रकार की हो रही हत्या की साजिश में पत्रकार की लाइसेंसी पिस्टल जप्त कर जनपद पुलिस का सहयोग करते नजर आये। किसी पत्रकार पर लगे आरोप की जांच एक सप्ताह में पूरी कराकर किर्तमान बनाया तो वहीं अन्य की अपनी तैनाती से लेकर आज तक जांच नहीं करा पाए। महामारी में सरकार गरीबों को खाद्यान्न तो वहीं जिलाधिकारी बेसहारा गायों के मसीहा बनते हुए भूसा जुटाते नजर आए योजना अंतर्गत 25 कुंटल से बड़े दानदाताओं के घर स्वयं जिलाधिकारी चल के जाते थे ओर महामारी में बेबसी और लाचारी की जिंदगी जी रहे गाय प्रजाति के सांड़ को कसाई संरक्षण देकर पुलिस राड़ करती नजर आयी जिन के एवज में जमकर हुई भ्रष्टाचारी कमायी । न्यायालय को कभी भी पूरा समय न दे पाने वाले जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय में वादी, प्रतिवादी के संग वकील अनायास की ही भाग दौड़ लगाते नजर आए। पूरे जनपद को गाइडलाइंस का पालन कराने वाले जिला अधिकारी के अपने ही कार्यालय में प्रतिदिन नियमों की धज्जियां उड़ती नजर आयी जहां आज तक कलेक्ट्रेट न्यायालय स्थित अधिवक्ता परिसर सेनीटाइज की राह जोहता नजर आया। सख्ती के नाम पर पुलिस और प्रशासन लगातार गरीब, कमजोर और मजबूर वर्ग पर जुल्म ढाता रहा पालिका परिषद नैतिक जिम्मेदारी छोड़कर कोरोना का गीत सुनाता रहा कोरोना भी जिम्मेदार और जनमानस की बेबसी पर कभी हंसता तो कभी मुस्कुराता रहा जो चिंता के साथ-साथ जांच का भी विषय नजर आता है।

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