
नजर आती है जिस कारण भ्रष्टाचार की बलिवेदी पर कत्ल हो रहे किसानों के अरमान के साथ फल ,फूल,चल रही कालाबाजारीयो की दुकान कहर बरपाती नजर आ रही हैं तथा वही प्रशासन की लाचारी से महामारी में किसानों के खून पसीने की कमाई पर बेखौफ होकर खाद्य विक्रेता डाका डालते नजर आते हैं। भ्रष्टाचार की मुहिम में रुपयों की खातिर ईमान बेच रहे जिम्मेदार आज काला बाजारियो पर नकेल कसने की जगह आपसी सांठगांठ और बंदरबांट का खेल खेलते हुए किसानों को अनायास ही भागदौड़ करवाते तथा उनकी बेकसूर जिंदगियों के संग घिनौना खेल खेलते नजर आते हैं। जिसके अंतर्गत 267 रुपया प्रति बोरी के दर से बिकने वाली यूरिया आज 400 रू प्रति बोरी की दर से बिकती नजर आती है ।बेबस, लाचार ,मजबूर गरीब किसान अपनी जिंदगी के साथ अपने बच्चों को जिलाने पालने तथा कर्ज पर लिए गए रूपयों को ब्याज समेत चुकाने की तड़प से धान की लहलाहाती यूरिया का मुंह निहारती फसलों के लिए मजबूरन शोषण का शिकार होते नजर आ रहे हैं जिस कारण एक तरफ भुखमरी और दूसरी तरफ कालाबाजारी की लाचारी कोढ़ में खाज नजर आती है तथा वही भ्रष्टाचार के आगोश में मदहोश जिम्मेदार भ्रष्टाचारी और काला बाजारी कर रहे दुकानदार मदमस्त नजर आते हैं ।कुछ अति प्रबुद्ध जीवी जब शिकायत स्वरूप जिलाधिकारी को फोन लगाते हैं तो उधर से जवाब हमेशा की ही तरह शून्य पाते हैं जो चिंता के साथ-साथ जांच का भी विषय नजर आता है।
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