जौनपुर।लाइन बाजार थाना क्षेत्र के परमार्थ हॉस्पिटल में 17 अगस्त को ऑपरेशन के दौरान महिला की मौत हो गई थी। महिला की मौत के बाद हॉस्पिटल से डॉक्टर और स्टाफ फरार हो गए थे। घटना के संदर्भ में परिजन द्वारा लाइन बाजार थाने में तहरीर दी गई थी। लेकिन 5 दिन बीत जाने के बावजूद अभी तक मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है। वहीं मृतक के परिवार को पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी नहीं मिली है। बहू को न्याय दिलाने के लिए ससुर सीएमओ कार्यालय, लाइन बाजार थाने और एसपी ऑफिस का चक्कर काटने को मजबूर हैं।
बक्सा थाना क्षेत्र के हीरापुर गांव की 23 वर्षीया काजल पांडे की मौत ऑपरेशन के दौरान लाइन बाजार थाना क्षेत्र के परमार्थ हॉस्पिटल में हुई थी। घटना के बाद हॉस्पिटल के स्टाफ और डॉक्टर फरार हो गए थे। स्वास्थ विभाग ने अस्पताल में ताला बंद करवा दिया था। इस संबंध में मृतक के परिजनों द्वारा लाइन बाजार थाने में तहरीर दी गई थी। स्वास्थ्य विभाग ने जांच के लिए 3 सदस्यीय टीम का गठन भी किया था। मृतक काजल पांडे के ससुर उदयराज पांडे ने बताया कि उन्हें अभी तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं मिली है।
मृतक काजल पांडे के ससुर उदयराज पांडे ने बताया कि उन्हें अभी तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं मिली है। घटना के 5 दिन के बाद भी पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया है। मृतक के ससुर उदय राज पांडे कहते हैं कि काजल को न्याय दिलाने के लिए वह पिछले 4 दिनों से सीएमओ कार्यालय, लाइन बाजार थाना और पुलिस अधीक्षक कार्यालय का चक्कर काट रहे हैं। काजल की मौत की पोस्टमार्टम रिपोर्ट की कॉपी भी उन्हें नहीं दी जा रही है। उनका आरोप है कि प्रशासन की मिलीभगत कर दोषियों को बचाना चाह रहा है। उनका कहना है कि सीएमओ ऑफिस जाने पर बताया जाता है कि लाइन बाजार थाना इस संदर्भ में मुकदमा दर्ज करेगा। जब लाइन बाजार थाना जाकर पता करते हैं तो वहां पर उन्हें बताया जाता है कि सीएमओ की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
5 दिन बीत गए हैं लेकिन अभी तक थाने पर मुकदमा पंजीकृत नहीं किया गया है। उन्हें पोस्टमार्टम रिपोर्ट की कॉपी तक नहीं दी गई है। अपर पुलिस अधीक्षक नगर डॉक्टर संजय कुमार का कहना है कि अस्पताल में हुई महिला की मौत के मामले में सीएमओ की जांच रिपोर्ट के आधार पर मुकदमा पंजीकृत किया जाएगा। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग से जो जांच रिपोर्ट आएगी उसी के आधार पर दोषियों के खिलाफ समुचित धाराओं में कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बोलम टेस्ट का हवाला देते हुए बताया कि स्वास्थ्य विभाग में लापरवाही की जांच रिपोर्ट सीएमओ तैयार करती हैं। पुलिस आखिर इस बात का पता कैसे लगाएगी कि डॉक्टर ने किस प्रकार की गलती ऑपरेशन के दौरान की है।

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