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Tuesday, 8 September 2020

जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय में नियमित नहीं होती कार्यवाही


जौनपुर। जनपद में अपनी तैनाती से लेकर आज तक लगातार जिला मजिस्ट्रेट का दायित्व ना निभा 
पाने वाले जिलाधिकारी वाहवाही हेतु जनपद में अनोखी योजनाओं को जन्म देते नजर आ रहे हैं जिसके अंतर्गत जमीनी विवाद के साथ-साथ पुलिस के रहमों करम पर फर्जी और मनमर्जी तरीके से फांसी गए पीड़ित फरियादियों के साथ-साथ बनाए गए निर्दोष आरोपियों को अनायास घर से कलेक्ट्री कचहरी तक का चक्कर लगाना पड़ रहा है तथा वही पीड़ित और बनाए गए आरोपियों के पक्षकार अधिवक्ता भी बेबसी और लाचारी में चक्र भ्रमण करते नजर आ रहे हैं तथा वही जनपद के विभिन्न थाना क्षेत्रों में पुलिस ,दबंग और भू माफियाओं की मार झेल रहे पीड़ित लाचार जनसुनवाई में बैठे अन्य जिम्मेदार कर्मियों के आगे मनुहार करते नजर आ रहे हैं।पुलिस और प्रशासन के रहमो करम पर भ्रष्टाचार की हदें पार कर रहे जिम्मेदार दबंग और रिश्वतखोरी करने में सक्षम लोगों की रहनुमाई तथा मददगार बनते नजर आ रहे हैं तथा वही बेकसूर लोगों पर खुलेआम जुल्म और सितम की हदों को पार तत्पश्चात मौत का शिकार होती नजर आती हैं। जनपद को पुलिस तथा भ्रष्ट प्रशासनिक सिस्टम के सहयोग से जमीनी विवाद को मुक्त कराने की योजना की लालसा रखने वाले जिलाधिकारी खुद अपने दायित्वों की लाचारी से जूझते नजर आ रहे हैं जो मौके पर फरियादियों को त्वरित निदान स्वयं नहीं कर पा रहे हैं तथा वही समय से न्यायालय में ना बैठ कर चहेतों के संग परिचर्चा तथा जनमानस को नए युग का आरंभ और प्रारंभ का शंखनाद करते नजर आ रहे हैं। प्रीत टाइम्स संवाददाता द्वारा जब इस प्रकरण पर कुछ नामी अधिवक्तओं से जानकारी चाही तो उन्होंने बताया कि न्यायालय में विधिक तौर से सालो साल न्याय के लिए न्यायालय का फरियादी चक्कर लगा रहे है जिनका निस्तारण करने के लिए जिम्मेदार अधिकारी सरकारी योजनाओ के पीछे भाग दौड़ करते दिखते है वहीं न्याय के खातिर पीड़ितों को सिर्फ अनायास की भाग दौड़ करवाते है ऐसे में थानों में मिलने वाला न्याय अन्याय को और रुख करता नजर आयेगा जो अविधिक कहलायेगा तथा भ्रष्टाचार और अपराध को बढ़ायेगा। एक तरफ जहां जिलाधिकारी तथा पुलिस अधीक्षक अपने-अपने विभाग में बृहद पैमाने पर फैल चुके भ्रष्टाचार को समाप्त करने में पूरी तरीके से नाकाम नजर आते हैं जिनके मातहतों के भ्रष्टाचारी सरकारी मूल्य को ही सुनकर अधिकांश पीड़ित खौफ से ही डर तथा बेबसी में मर जा रहे हैं जो चिंता के साथ-साथ जांच का भी विषय नजर आ रहा है।

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