
उन्नाव। कुलदीप सेंगर मामले में बलात्कार की पीड़ित महिला की चीख पुकार और न्याय की गुहार को
प्रशासनिक पदों पर तैनात महिला जिम्मेदारों ने लाचार और उसका शिकार कर डाला।शासन के रहमो करम पर अथवा छत्रछाया में पल रहे माननीय ,सम्माननीय ,अपराधियों के अपराधिक कृत्यों पर किस कदर प्रशासन के मुख्य अंग माने जाने वाले जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक जुर्म में न्याय के खिलाफ कहर बरपाते हैं ,अपराधी प्रवृत्ति के लोगों पर रहम बरसाते हैं तथा पीड़ित परिजनों को मौत की नींद सुलाते हैं इसका अंदाजा लगाना बहुत मुश्किल और कठिन नजर आता है। जबकि वही मामले की जांच कर रही सीबीआई ने तत्कालीन डीएम समेत दो आईपीएस व एक पीपीएस को दोषी मानते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है। सीबीआई ने जिनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है उनमे तत्कालीन डीएम अदिति सिंह, दो पूर्व एसपी नेहा पांडेय और पुष्पांजलि सिंह शामिल हैं। इसके अलावा तत्कालीन अपर पुलिस अधीक्षक अष्टभुजा सिंह के खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश की गई है, सीबीआई ने चारों अधिकारियों को मामले में लापरवाही बरतने का दोषी माना है, सीबीआई ने चारों अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की है। जिस कारण एक तरफ प्रशासन के जिम्मेदार पदों पर बैठे दागदार होते नजर आ रहे हैं तो वही सीबीआई एक बार दोबारा से अस्पष्ट खुलासा करके वाहवाही लूटती नजर आ रही हैं।अपराध की बलिवेदी पर अपहरण ,बलात्कार फिर हत्या की शिकार लगातार हो रही अनगिनत जिंदगियां मरने के बाद अपराधियों से भी अधिक ऐसे भ्रष्ट पदों पर बैठे शोहदों की रहनुमाई कर रहे जिम्मेदारों को भी कोशती नजर आती हैं।
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